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Sunday, December 26, 2010

भूत

*


भूत कभी मरता नहीं .

जितना भागोगे ,घेरेगा .

दौड़ना मत, भगाता चला जाएगा.

दूर ,और दूर !

तंत्र-मंत्र अभिचार , सब बेकार ,

अपना मौका तलाशता

हवाएँ सूँघ लेता है .

*

अकेली ,कुछ कमज़ोर ,

शिथिल-सी मनस्थिति देख

अनायास छाया सा घिर ,

तन-मन आविष्ट-अवसन्न कर

छोड़ देता है किसी अगाध में .

*

जितना भागोगे ,घेरेगा ,

भगाता चला जाएगा ,

विस्मृति भरी दूरियों तक.

और उसके लिए सच है -

जहाँ पलट कर देखो ,

पीछे लग जाएगा .

क्योंकि भूत कभी मरता नहीं .

*