*
भूत कभी मरता नहीं .
जितना भागोगे ,घेरेगा .
दौड़ना मत, भगाता चला जाएगा.
दूर ,और दूर !
तंत्र-मंत्र अभिचार , सब बेकार ,
अपना मौका तलाशता
हवाएँ सूँघ लेता है .
*
अकेली ,कुछ कमज़ोर ,
शिथिल-सी मनस्थिति देख
अनायास छाया सा घिर ,
तन-मन आविष्ट-अवसन्न कर
छोड़ देता है किसी अगाध में .
*
जितना भागोगे ,घेरेगा ,
भगाता चला जाएगा ,
विस्मृति भरी दूरियों तक.
और उसके लिए सच है -
जहाँ पलट कर देखो ,
पीछे लग जाएगा .
क्योंकि भूत कभी मरता नहीं .
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